मन की अल्फा अवस्था

मन की अल्फा अवस्था का महत्त्व –

दोस्तों जैसा की हमने अपने पिछले लेख में जाना कि हमारे लिए हमारे मन की अल्फा अवस्था का एक विशेष महत्त्व है। इस अवस्था के कई फायदे है। इसीलिए दिन में कम से कम एक बार अवश्य आल्फा अवस्था मे बैठकर अपने अवचेतन मन को अच्छे सुझाव देने चाहिए।

अल्फा अवस्था हमारे शरीर द्वारा ही शरीर की चिकित्सा या उपचार करने की शक्ति (Healing Power) को बढ़ा देती है। हमारा शरीर अल्फा अवस्था के कारण आयु रहित बन सकता है। जब हम अल्फा अवस्था मे पहुँचते है तब हमारी आयु बढ़ने की प्रक्रिया (Aging Process) बंद हो जाती है। जिससे की हमारा आयुष्य बढ़ता है।

प्राचीन काल मे ऋषि मुनि तपस्या में अल्फा अवस्था मे बैठे रहते थे और वो 500-1000 साल तक जी जाते थे।

अब सवाल ये उठता है कि आखिर अल्फा अवस्था में पहुचा कैसे जा सकता है ?

तो हम आल्फा अवस्था मे दो तरीके से पहुच सकते है –

  1. Naturally (कुदरती या प्राकृतिक प्रक्रिया से)
  2. Voluntarily (स्वेच्छा से)
  1. कुदरती (Naturally) : – रात को जब हम सोने जाते है तब ओर जब सुबह हम उठते हे तब हम प्राकृतिक रूप से अल्फा अवस्था के समीप होते है। इस समय हम अपने थोड़े से प्रयास से बड़ी आसानी से अल्फा अवस्था में पहुँच कर अपना कार्य साध सकते है।
  2. स्वेच्छा से (Voluntarily) : अगर हम चाहे तो अपनी मर्जी से भी अल्फा अवस्था में पहुच सकते है। ओर वो है Relaxation की एक विधिवत प्रक्रिया। विधिवत Relaxation का उपयोग करके हम आसानी से जब चाहे तब अल्फा लेवल पर पहुच सकते है।

मन की प्रोग्रामिंग (Mind Programming)

अवचेतन मन एक सॉफ्टवेयर (Software) या रोबोट (Robot) की तरह है, जिसकी प्रोग्रामिंग चेतन मन द्वारा की जाती है। अवचेतन मन एक रोबोट की तरह है जो स्वंय कुछ अच्छा बुरा सोच नहीं सकता, वो तो केवल हमारे चेतन मन द्वारा पहले से की गई प्रोग्रामिंग के अनुसार स्वचालित तरीके से कार्य करता है।

हमारे हर एक विचार का हमारे अवचेतन मन पर बड़ा गहरा एवं महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है या यह कह सकते है कि हम जो कुछ भी सोचते है या करते है उससे हमारे अवचेतन मन की प्रोग्रामिंग होती जाती है और फिर बाद में धीरे धीरे अवचेतन मन उस कार्य को नियंत्रित करने लगता है।

हमारी आदतों और धारणाओं का निर्माण भी ऐसे ही होता है और बाद में वह आदत स्वचालित रूप से अवचेतन मन के द्वारा नियंत्रित होती है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपने अवचेतन मन की प्रोग्रामिंग कैसे करते है| एक बार प्रोग्रामिंग हो जाने के बाद अवचेतन मन उसी के अनुसार कार्य करने लगता है – चाहे वह कार्य गलत हो या सही।

चेतन मन को विचारों का चौकीदार या गेटकीपर (Gate Keeper) भी कहा जा सकता है दरअसल हमारा हर विचार एक बीज की तरह है और हमारा अवचेतन मन बगीचे की तरह है। हमारा चेतन मन ये निर्णय करता है कि अवचेतन मन में कौनसा बीज बोना है और कौनसा नहीं।

हम कभी कभी अनजाने में अपने अवचेतन मन की गलत प्रोग्रामिंग कर देते है, जैसे – अगर मैं यह सोचता हूँ आज मैं यह लेख नहीं लिखूंगा तो यह छोटा सा विचार धीरे धीरे मेरे कार्य को कल पर टालने की आदत बन सकता है।

गहन चिंतन और मैडिटेशन के द्वारा हम अवचेतन मन की Reprograming करके इसमें पहले से डाले गए या इन्स्टाल (Install) किए हुए गलत सॉफ्टवेयर को धीरे-धीरे डिलीट कर सकते है। हमारे जीवन के एक महत्वपूर्ण भाग को “अवचेतन मन” नाम का रोबोट नियंत्रित करता है और यह रोबोट, चेतन मन द्वारा की गयी प्रोग्रामिंग से नियंत्रित होता है।

इस रोबोट की प्रोग्रामिंग विचार रुपी बीज से होती है। इसलिए सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम कौनसे विचार चुनते है और अपने अवचेतन मन में किस तरह के सॉफ्टवेयर इंस्टाल करते है।