मन की विशेषताएं –

हमारे चेतन ओर अवचेतन मन की विशेषताएं अलग अलग है। हमारे सम्पूर्ण शरीर की शक्ति चेतन मन के पास केवल 10% है वहीँ दूसरी और अवचेतन मन के पास 90% शक्ति है। दोस्तों मन पानी मे रहे बर्फ के पहाड़ की तरह है। जिसका मात्र 10% हिस्सा पानी के बाहर रहता है और 90% हिस्सा पानी के अंदर। ठीक उसी तरह हमारा चेतन मन हम को दिखाई देता है परंतु अवचेतन मन पानी मे डूबे बर्फ के पहाड़ की तरह दिखाई नही देता लेकिन वास्तव में वह होता जरूर है।
चेतन मन जब हम जाग्रत होते है तभी काम करता है लेकिन अवचेतन मन 24 घंटें काम करता है। कोई भी काम करने का आदेश पहले चेतन मन के पास जाता है और उसके बाद वो अवचेतन मन के पास पहुँचता है। इस तरह चेतन मन एक फ़िल्टर के जैसे काम करता है, जो मिले हुए आदेश में से अच्छे बुरे का फर्क करके ही जरूरी सूचना को अवचेतन मन के पास भेजता है। कोई भी लक्ष्य तय करने में चेतन मन उपयोग होता है और अवचेतन मन उस लक्ष्य को पूरा करता है।

मन और आत्मा – (Mind & Soul)

मन और आत्मा – (Mind & Soul)

कहा जाता है जब भी किसी की आत्मा (Soul) उसका शारीर छोड़कर जाती है तो उसकी मृत्यु हो जाती है ऐसा माना जाता है। यदि इसी बात को और गहराई से समझा जाये तो कहा जा सकता है कि हमारा अवचेतन मन ही हमारी आत्मा है। वास्तव में जब अवचेतन मन काम करना बंद कर देता है तभी ऐसा होता है। अर्थात जब शरीर के की जो भी क्रियाए है वो सब हमारे अवचेतन मन करता है और जब वो समस्त क्रियायें अपना कार्य करना बंद कर देती है तभी इंसान की मृत्यु हो गयी है ये मान लिया जाता है। इस तरह हमारा अवचेतन मन ही हमारी आत्मा है। ओर सभी का अवचेतन मन एक अलौकिक शक्ति के साथ जुड़ा होता है जिसे हम परमात्मा कहते है।

मन का स्थान – (Place of Mind)

मन का स्थान – (Place of Mind)

लोग यह सोचते रहते है कि मन हमारे शरीर मे कहाँ होता है और ज्यादातर लोग हमारे अवचेतन मन को दिल या दिमाग होने के बारे में सोचते है। किन्तु यहाँ ये जानना आवश्यक है कि मन कोई भौतिक वस्तु या कोई चीज नही है, जिसे हम भौतिक रूप से देख सकते है। बल्कि मन एक शक्ति है, मन एक ऊर्जा है। हमारा चेतन मन का स्थान है हमारा मस्तिष्क (Brain), जो हमारे सिर के भीतर होता है। वहीँ हमारा अवचेतन मन हमारे पेट मे जठर के पीछे चेततंत्रा की जाली में होता है। उसे हम पेट का मगज, नाभि चक्र, सूर्य चक्र इत्यादि नाम से जानते है।

मन के विविध नाम – (Miscellaneous Names of Mind)
दुनिया में लोगो ने मन को अपने अनुसार अलग अलग नाम दिया है। जिनमे से कुछ निम्न है।

चेतन मन को नीचे दिए गए नाम से भी जाना जाता है।

  • तार्किक मन (Logical Mind)
  • प्रथ्क्करण मन (Analytical Mind)
  • बाँयां दिमाग़ (Left Brain)
  • बाह्य मन (Outer Mind)
  • ज्ञात मन (Known Mind)
  • जागृत मन (Conscious Mind)

वहीँ अवचेतन मन को भी नीचे दिए गए कुछ नामों से जाना जाता है।

  • बिन तार्किक मन (Illogical Mind)
  • सृजनात्मक मन (Creative Mind)
  • दांयाँ दिमाग (Right Brain)
  • अन्तर्मन (Inner Mind)
  • अज्ञात मन (Unknown Mind)
  • अर्ध जागृत मन (Subconscious Mind)
  • मन की अवस्थाएँ – (States of Mind)

हमारे मन में चार प्रकार की तरंगें होती हैं। जिस तरह हृदय की तरंगों को ईसीजी द्वारा मापा जाता है, उसी तरह ब्रेन की तरंगों को मापने का यंत्र विद्युतमस्तिष्कलेखन – EEG (Electro Encephalo Gram) है।

ब्रेन की चार तरह की तरंगें होती हैं।

  • बीटा
  • अल्फा
  • थीटा
  • डेल्टा
विद्युतमस्तिष्कलेखन
  1. बीटा अवस्था

बीटा तरंगों में हमारा ब्रेन पूरी तरह सक्रिय रहता है जिसमें हमारी दिमागी तरंगें 14 से 30 प्रति मिनिट तक चल रही होती हैं। यह पूर्ण जागरूक अवस्था है।

  1. अल्फा

अल्फा तरंगों में हमारा चेतन मन थोड़ा शांत हो जाता है, इस समय हमारी दिमागी तरंगें 8 से 13 के बीच प्रति मिनट चल रही होती हैं। इसे हम आधी जागी और आधी सोई हुई अवस्था कहते हैं यानी अर्धसुप्त अवस्था।

  1. थीटा अवस्था

थीटा तरंगों में हमारा चेतन मन पूरी तरह शांत होकर निद्रा में चला जाता है। इसमें हमारी दिमागी तरंगें 4 से 7 के बीच प्रति मिनट हो जाती हैं। इसे हम पूर्ण निद्रा की अवस्था कह सकते हैं। इस अवस्था में हम खूब सपने देखते हैं। इस अवस्था में हम अपने गहरे अवचेतन मन के नजदीक होते हैं।

  1. डेल्टा अवस्था

डेल्टा तरंगों में हम गहरी निद्रा या गहरी समाधि जैसी अवस्था में पहुंच जाते हैं जहां हमारे दिमाग की तरंगें पूरी तरह शांत होकर 3 से 5 के बीच प्रति मिनट चल रही होती हैं। इस अवस्था में हम पूर्ण रूप से बेहोश होते हैं। यह गहरी निद्रावस्था 8 घंटे की नींद में मुश्किल से 2 घंटे के आसपास होती है। इसमें सपने और अवचेतन मन बिल्कुल शांत एवं निष्क्रिय हो जाते हैं।

अवचेतन मन को सुझाव देने के लिए गहरी अल्फा स्थिति ही अपने आप में पर्याप्त है। दिन में जब हम जाग रहे होते है तब हमारा चेतन मन कार्यरत होता है। ओर जब हम रात में सो जाते है तब हमारे अवचेतन मन कार्यरत होता है। अब ऐसी परिस्थिति में हम कोई भी बात हमारे अवचेतन मन को पहुँचाना चाहते है तो हमे एक ऐसी अवस्था मे जाना पड़ेगा कि जिस अवस्था मे हमारे दोनों मन कार्यरत हो। और यह सिर्फ आल्फा अवस्था मे संभव होता है।

इसलिए अल्फा अवस्था का हमारे जीवन में बहुत ही महत्त्व है क्योंकि अल्फा अवस्था में ही हम कोई भी सन्देश हमारे चेतन मन से अवचेतन मन को दे सकते है।